पेट से जुड़ी होती हैं 90% बीमारियां, जानें लक्षण और उपाय

पेट से जुड़ी होती है 90 प्रतिशत बीमारियां, अपनाएं ये उपाय (फोटो: Pixabay.com)
पेट से जुड़ी होती है 90 प्रतिशत बीमारियां, अपनाएं ये उपाय (फोटो: Pixabay.com)

आज की फास्ट लाइफ में जिसे कब्ज की शिकायत न हो, वह बड़ा ही भाग्यशाली व्यक्ति है. उसे न तो किसी प्रकार का रोग सतायेगा और न ही मानसिक तनाव, घबराहट और बेचैनी जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा.

असल में लोग खाने के लिए जीते हैं जबकि जीने के लिए खाया जाना चाहिये. आज की भागदौड़ और तेज रफ्तार जिंदगी ने हमारी दिनचर्या को बिगाड़कर रख दिया है. हमें क्या खाना चाहिये, क्या नहीं, खुद को पता नहीं. कब्ज होने से खट्टी डकारें आना, पेट फूलना, पेट में गैस बने रहना, बेचैनी महसूस होना, बाल पकना, बवासीर, स्वप्नदोष, वीर्यपात, शीघ्रपतन एवं नामर्दी जैसे शर्मनाक रोग होते हैं. कुल मिलाकर पेट से नब्बे प्रतिशत रोग जन्म लेते हैं.

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है पेेट और मन का साफ होना यानी पेट पूर्णरूप से साफ हो और दिमाग में किसी तरह की चिन्ता न हो तो किसी भी तरह का रोग हो ही नहीं सकता. कहावत है ’मन प्रसन्न तो तन स्वस्थ और तन स्वस्थ तो मन प्रसन्न.’ तन और मन दोनों का चोली दामन का रिश्ता है.

इस रोग से मुक्ति पाने का आसान तरीका है भोजन को चबा-चबाकर धीरे-धीरे खाएं. इससे हजम होने में तो मदद मिलती ही है, इसके साथ आत्म संतोष मिलता है जो स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है. भोजन के मध्य में घूंट-घूंटकर पानी पिएं और अन्त में बिल्कुल पानी न पिएं. भोजन के तुरन्त बाद पेशाब करें. इससे शरीर से विजातीय पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और रोग की संभावना खत्म हो जाती है.

ज्यादा मिर्च-मसालेदार, तेल और मांस-मछली के अलावा सिगरेट, तम्बाकू, शराब इत्यादि का सेवन बिल्कुल न करे. जहां तक संभव हो, शाकाहारी बनने की कोशिश करें. इससे हमारे आमाशय में लचीलापन रहता है, मल को बाहर फेंकने में आसानी होती है और कब्ज का नाश होता है.

एक और नियम है उषापान जो स्वास्थ्य हेतु लाभदायक है. उषापान करने से पहले इसे समझ लें. सूर्योदय से एक डेढ़ घंटे पहले के समय को उषाकाल कहते हैं. बिस्तर से उठकर इस बेला में सबसे पहले रात में रखा बासी पानी जो तांबे के लोटे में रखा हो, घूंट-घूंटकर शुरू में एक गिलास और धीरे-धीरे चार गिलास तक बढ़ा लें. पानी पीने के बाद कुछ दूर चहल कदमी करने के बाद शौचक्रिया (मल विसर्जन) करें.

रात में खाना खाने के बाद शौचक्रिया अवश्य करें भले ही हाजत हो या न हो. दो-चार दिन तक करने पर हाजत हो जाती है. यदि हो सके तो रात को पानी रखते समय उसमें दो हरड़ डाल दें. सुबह पानी पीने से पहले कुल्ला करके फूले हुए हरड़ को पूरा चबा-चबाकर खा लें, तब पानी पिएं.

उषापान करने पर कब्ज का नाश तो होता ही है, इसके अतिरिक्त पेट की गर्मी शान्त होती है. वात, पित्त और कफ का शमन होता है जिससे त्रिदोष नामक रोग नहीं होता. बाल काले और चमकीले होते हैं. आंखों की ज्योति बढ़ती है और त्वचा में चमक बनी रहती है.

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