महिलाओं के लिए जानलेवा है ये लत, खराब हो सकतेे हैं लीवर, किडनी और हार्ट

महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है धूम्रपान और शराब. (फोटो: Pixabay.com)
महिलाओं के लिए खतरनाक हो सकता है धूम्रपान और शराब. (फोटो: Pixabay.com)

कॉम्पिटीशन, जॉब और मॉर्डन होने के फेर में महिलाओं में धूम्रपान, शराब और नशाखोरी की लत लग रही है. यही नशा उनकी समय पूर्व जान ले रहा है. महानगरीय संस्कृति में धूम्रपान एवं शराब सामान्य बात हो गई है.

दरअसल, यह आधुनिकता की देन व पहचान है. यही फैशन व प्रचलन में है किंतु जो महिला ऐसा नहीं करती, वह पिछड़ी समझी जाती है. महिलाओं की शारीरिक रचना के कारण यही शराब व सिगरेट आदि की आधुनिकता उनके जीवन में मुसीबतें खड़ी कर रही है, उसे कष्टकर बना रही है.

मदिरापान एवं धूम्रपान की प्रवृत्ति ने शहर से लेकर गांव तक में अपनी घुसपैठ कर ली है. गांवों में बीड़ी पीती, तंबाकू खाती एवं हुक्का पीती महिलाएं दिख जाती हैं. वनों में हाथ से बनी शराब का सेवन कर उनके नाच के अवसरों पर झूमती आदिवासी महिलाएं दिख जाती हैं. कई राज्यों में तो वहां की सरकारों ने गली-कूचों तक में मदिरा की वैध-अवैध दुकानें खुलवा उसे सर्वसुलभ बना दिया है. आम जनता को भले ही खाने को राशन व बीमारी से बचने कोे दवा न मिले पर मदिरा तो घर से बाहर जाते ही मिल जाती है.

धूम्रपान एवं मदिरापान की इस स्थिति के बाद भी शहर के सापेक्ष में गांवों में इसके सेवनकर्ता कम हैं. महानगरों में नशा सेवन की स्थिति भयावह है. कॉलेज जाने एवं बड़े पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियां तक इसकी शिकार हैं. गांव के सापेक्ष में शहरों का प्रदूषण स्तर भी खतरनाक स्तर पर है. यही सब मिलकर महिलाओं की जान समय पूर्व लेने में लगे हैं. यह महिलाओं के साथ-साथ उनकी संतानों के स्वास्थ्य को चौपट कर रहा है. नशापान करने वाली महिलाएं विकृतिग्रस्त बच्चे को जन्म दे रही हैं.

महिलाओं पर प्रभाव:  धूम्रपान एवं मदिरापान का महिलाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है टी.बी., गला-कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर, मुख-कैंसर हो सकता है. लीवर खराब हो जाता है.

पाचन प्रभावित होता है. गर्भधारण क्षमता कम हो जाती है. गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है. गर्भस्थ बच्चे का मस्तिष्क अविकसित रह जाता है. उसके बच्चों की मानसिक क्षमता कम रह जाती है. शिशु मानसिक व शारीरिक विकलांग बन सकता है. उसका वजन कम होता है बौद्धिक स्तर कम रहता है. दूध की मात्रा कम हो जाती है. मृतशिशु भी पैदा हो सकता है.

मासिक स्राव की अनियमितता बढ़ जाती है. उनके स्वयं के खून में थक्का जम सकता है जो हृदयाघात का कारण बनता है. ऐसे में इतने सब रोगों के कारण नशेपान को किसी भी दृष्टि से सही आधुनिकता की पहचान का मापदंड नहीं माना नहीं जा सकता. एक तो महिलाओं को स्वयं की कई बीमारियां होती हैं और नशापान उनको और बढ़ा देता है एवं समय पूर्व जान जाने का कारण बनता है.

सीतेश कुमार द्विवेदी

स्तंभकार और लेखक.

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