हाथ-पैरों की जकड़न और कमर-पीठ दर्द हो सकते हैं ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण, जानें उपाय

ऑस्टियोपोरोसिस धीरे से हड्डियों में प्रवेश कर जाता है. जोड़ों में दर्द रहना, चाल में टेढ़ापन आना, घुटनों में गैप, हड्डियों का टेढ़पन यही इसके लक्षण हैं.
ऑस्टियोपोरोसिस धीरे से हड्डियों में प्रवेश कर जाता है. जोड़ों में दर्द रहना, चाल में टेढ़ापन आना, घुटनों में गैप, हड्डियों का टेढ़पन यही इसके लक्षण हैं. (फोटो : Pixabay.com).

हड्डियां हमारे शरीर की संरचना का आधार हैं. अगर आधार कमजोर होगा तो शरीर का ढांचा भी ढीला-ढाला होगा और अगर आधार ठोस होगा तो ढांचा भी ठोस होगा. हड्डियां ही शरीर को आकार देती हैं, शरीर को संभालती हैं और मांसपेशियों को जोड़कर रखती हैं जिससे हम चल फिर, उठ -बैठ, हाथों से काम ले सकते हैं.

क्यों खराब होती है हड्डियां
हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में कैल्शियम का रोल अहम है. हड्डियों की वृद्धि 16 से 18 वर्ष तक होती है. उसके बाद हड्डियों का घनत्व अक्सर कम होने लगता है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस रोग होने लगता है, जिसका अर्थ है हड्डियों का क्षरण. जब हड्डियों का क्षरण या भुरभुरापन अधिक होने लगता है तो हमारी हड्डियां बहुत पतली और कमजोर पड़ जाती हैं, जो थोड़ी सी चोट से टूट सकती हैं. ऑस्टियोपोरोसिस रोग धीरे से हमारे हड्डियों में प्रवेश कर जाता है जिसका असर काफी समय बाद होता है जैसे जोड़ों में दर्द रहना, चाल में टेढ़ापन आना, दोनों घुटनों में गैप का बढ़ना, हड्डियों का टेढ़ा होना, फ्रेक्चर होना आदि.

किन्हें होता है ऑस्टियोपोरोसिस होता
वैसे तो यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है. उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, पर कई केसेस में आस्टियोपोरोसिस छोटी उम्र के लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लेता है, जिनका रहन सहन, खान-पान बिलकुल ठीक न हो, जो  अधिक समय निष्क्रिय रहते हों, अधिक मोटे हों.

बहुत सिगरेट और शराब पीनेे की वजह से भी ये घातक बीमारी होती है; (फोटो : Pixabay.com).
बहुत सिगरेट और शराब पीनेे की वजह से भी ये घातक बीमारी होती है; (फोटो : Pixabay.com).

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण
खाने में कैल्शियम की मात्रा काफी कम लेते हों या अधिक पतले होते हैं.
आनुवंशिक कारण और शारीरिक श्रम न करने वाले
वजन न उठाने वाले किसी लंबी बीमारी में स्टीरायड्स के सेवन के कारण.
मिर्गी के रोगी जो दवा लेते हैं, उससे भी हड्डियां भुरभुरी होने लगती हैं.
ज्यादा शराब और धूम्रपान करने वाले.
अधिक डायटिंग करने वाले.
जरूरत से अधिक व्यायाम करने वालों व अधिक बोझ ढोने वालों को.
जिन महिलाओं को माहवारी देर से शुरू हुई हो या जल्दी बंद हो गई हो.
गर्भाशय या अंडाशय निकाल दिए जाने वाली महिलाओं को.
अधिक सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेवन करने वालों को.

ऑस्टियोपोरोसिस रोग क्या जानलेवा हो सकता है
नहीं, ऑस्टियोपोरोसिस जानलेवा तो नहीं है, पर इंसान को अपंग बनाने में मदद करता है. हमारे देश में 65 वर्ष से ज्यादा उम्र की महिलाएं या पुरूष तो अक्सर इस रोग से ग्रस्त हैं, पर जब 30 से 40 वर्ष की आयु के लोग इसके शिकार हो जाते हैं तो उन्हें जीना भारी लगता है क्योंकि उन्हें अक्सर दर्द रहता है और फ्रेक्चर जल्दी होते हैं. उठना-बैठना, काम करना, कहीं आना जाना उनके लिए कठिन होता जाता है. ऑस्टियोपोरोसिस रोग में लंबाई कम होने लगती है.

जांच कैसे करवाएं
लगातार किसी भी जोड़ में दर्द रहने पर डॉक्टर से परामर्श लें. उनके बताए अनुसार टेस्ट करवाएं जैसे एक्सरे, अल्ट्रासाउंड. बोन डेंसिटी टेस्ट और डेक्सा स्केन आदि. पता लगने पर इलाज बिना किसी इंतजार के प्रारंभ करवाएं. डेक्सा स्केन टेस्ट के माध्यम से प्रारंभिक स्टेज का पता चल सकता है. एक्सरे और अन्य टेस्टों के माध्यम से जब हड्डियों का 30 प्रतिशत क्षरण हो जाता है तब पता चलता है. डेक्सा स्केन 3 से 5 हजार की लागत तक होता है जबकि एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, बोन डेंसिटी 1500 से 2000 तक होता है.

ऑस्टियोपोरोसिस लाइलाज नहीं है. इसका इलाज संभव है. (फोटो : pixabay.com).
ऑस्टियोपोरोसिस लाइलाज नहीं है. इसका इलाज संभव है. (फोटो : pixabay.com).

इलाज से होता है ये लाभ
ऑस्टियोपोरोसिस रोग लाइलाज नहीं है. उसमें पहले की हड्डियों का भुरना तो कम नहीं किया जा सकता पर आगे के लिए रोका जा सकता है. दर्द भी हमेशा के लिए तो खत्म नहीं होता पर दर्द को इलाज द्वारा कम किया जा सकता है.

आराम और दर्दनिवारक दवा का सेवन करें
डॉक्टर के परामर्श अनुसार दवा की सही मात्रा लें और डॉक्टर के अनुसार जितने आराम की आवश्यकता हो, करें, तभी आराम मिलेगा. अपनी जीवन शैली में बदलाव लाएं. कितनी कसरत और कैसी कसरत आपके लिए आवश्यक है, यह डॉक्टर से परामर्श कर करें. अगर चलते समय सहारे की आवश्यकता हो तो छड़ी का उपयोग करने से परहेज न करें.

खाने में शामिल करें ये चीजें
कैल्शियम उत्पादों का सेवन सही मात्रा में करें, अगर आप दूध, दही, पनीर, लस्सी का सेवन कम करते हैं. डॉक्टर के बताए अनुसार कैल्शियम दवा के रूप में लें क्योंकि रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को कैल्शियम की आवश्यकता अधिक होती है. तब उन्हें 1000 मिली ग्राम से 1500 मिलीग्राम तक कैल्शियम रोज चाहिए होता है. कैल्शियम के साथ विटामिन डी भी लें. सर्दियों में आप 30 मिनट तक हल्की धूप में बैठ कर इस कमी को पूरा कर सकते हैं. वैसे आजकल कैल्शियम विटामिन डी के साथ भी उपलब्ध है.

लाइफ स्टाइल को बदलकर इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है. एक्सरसाइज से भी इसमें बहुत फायदा होता है. (फोटो : pixabay.com).
लाइफ स्टाइल को बदलकर इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है. एक्सरसाइज से भी इसमें बहुत फायदा होता है. (फोटो : pixabay.com).

इसके अतिरिक्त ध्यान दें
जीवन शैली में बदलाव करें. हड्डियां हमारे जीवन के अंत तक हमारे साथ हैं. अगर हम खान-पान और व्यायाम से इनकी देखभाल करेंगे तो ये हमारा साथ और अच्छी तरह देंगी. हमें पौष्टिक आहार लेना चाहिए. भोजन में चीज, पनीर, घी दही, हरी सब्जियां और सोयाबीन को नियमित रूप से लें. लड़कियों को 10 वर्ष की आयु के बाद हल्के व्यायाम करवाएं और अच्छी खुराक दें ताकि हड्डियां मजबूत बन सकें.

क्या करें विशेष रूप से महिलाएं
सबसे पहले हार्मोंस की जांच करवाएं. अगर माहवारी खत्म होने से पहले हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की आवश्यकता हो तो डॉक्टर सलाह अनुसार लें. पुरूषों में हार्मोन थेरेपी की लेट एज में आवश्यकता पड़ती है, महिलाओं में जल्दी. जो पुरूष धूम्रपान और शराब का सेवन अधिक करते हैं उन्हें इस थेरेपी की आवश्यकता थोड़ी जल्दी पड़ सकती है.

(नोट : ऑस्टियोपोरोसिस को लेकर डॉक्टर से जरूर राय लें. ये लेख आपकी जानकारी और जागरूकता बढ़ाने के लिए साझा किया गया है.)

(इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं. India-reviews.com इसमें उल्लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है. यहां प्रकाशित होने वाले लेख और प्रकाशित व प्रसारित अन्य सामग्री से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है. आप भी अपने विचार या प्रतिक्रिया हमें editorindiareviews@gmail.com पर भेज सकते हैं.)

नीतू गुप्ता

लेखक और पत्रकार.

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