कहीं आप भी पकाऊ, चिपकू तो नहीं, लोग घर-ऑफिस में आपको झेल तो नहीं रहे? छोड़ें ये आदतें..!

क्या आप अपने आसपास, घर में चिपकू कहे जाते हैं? क्या लोग आपसे चिढ़ने लगे हैं? ऐसे पहचानें. (फोटो : Pixabay.com).
क्या आप अपने आसपास, घर में चिपकू कहे जाते हैं? क्या लोग आपसे चिढ़ने लगे हैं? ऐसे पहचानें. (फोटो : Pixabay.com).

क्या आप उन लोगों में से तो नहीं जो हर बात में चिढ़ाते हैं. एकदम पकाऊ बातेंं करते हैं और जिन्हें झेलना मुश्किल होता है. यही नहीं जिन्हें देखते ही लोग गली बदल देते हैं. यदि ऐसा है तो संभल जाएं. ऐसे लोगों को चिपकू कहा जाता है. चिपकू की उपाधि जाने-अनजाने में कई लोगों को मिल जाती है. और वे चिपकू नाम से पहचाने-जाने लगते हैं. क्या आप किसी दोस्त की इस आदत से वाकिफ हैं. यदि हां तो आपको उन लोगों से मिलकर कैसा लगता है. यकीनन अच्छा नहीं. दरअसल ज्यादातर लोग ऐसे लोगों से कन्नी काटना बेहतर समझते हैं.

क्या करते हैं चिपकू
कभी चिपकू लोगों से मिलने पर कुछ खमियाजा भी भुगतना पड़ सकता है, जैसे कहीं जा रहे हैं तो उनके आने पर समय पर नहीं पहुंच पाएंगे आप. मेडिसिन लेने जा रहे हैं तो पीछे से घर के लोग परेशान हो जाएंगे. ट्रेन, बस तक छूट सकती है. शॉपिंग करने जा रहे या तो ऐसे लोग बिन बुलाये मेहमान बन जाते हैं, साथ चल पड़ते हैं या इतना टाइम खराब कर देते हैं कि दुकानें बंद हो जाती हैं.

ऑफिस के लिए भी इफेक्टिव
यदि आप ऑफिस जा रहे हैं, तो लेट होने पर सीनियर से डॉंट खानी पड़ सकती है. ऐसी परेशानियों से बचने के लिए कुछ सोचें.आइए जानते हैं क्या कर सकते हैं आप.

ऐसे लोगों की बातों को अधिक महत्त्व न दें. फिर भी चिपके हुए बातें कर रहे हैं तो उनकी बातों को गंभीरतापूर्वक न सुनें .

चिपकू लोगों को टालने के लिए जितना हो सकें कम बोलें. फोटो : (pixabay.com)
चिपकू लोगों को टालने के लिए जितना हो सकें कम बोलें. फोटो : (pixabay.com)

1-जवाब के रूप में हां या न का प्रयोग अधिक करें. सलाह, मशविरा कम से कम दें.

2-कभी-कभी स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि अभी आप जल्दी में या किसी आवश्यक काम को पूरा करने में जुटे हैं. फिर कभी मिलने को कहें.

3-चिपकू मेहमानों को जलपान जल्दी करवायें और अपना पीछा छुड़वायें.

अपने आप को चिपकू नहीं कहलवाना चाहते तो इन सब बातों को समझें. यदि दूसरों का व्यवहार आपके साथ ऐसा है तो समझें कि आप भी कहलाए जा सकते हैं चिपकू. वैसे बातें करना कोई बुरा नहीं है पर टाइम लिमिट को हमेशा ध्यान रखें. बोलने से पहले सोचकर, तोलकर बोलें. ज्यादा समय किसी के यहां न बैठें. दूसरों की सुविधा, परेशानियों पर ध्यान दें, अधिक सुझाव न थोपें. ऐसा करने पर आप अच्छे दोस्त कहलाएंगे..!

नीतू गुप्ता

लेखक और पत्रकार.

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