कैंसर लाइफ-स्टाइल के उस अंधेरे कोने से घुसता है जिसे देखने का हमें कभी टाइम नहीं मिला..!

कैंसर का सबसे बड़ा कारण है-पर्यावरण प्रदूषण. दो-तिहाई कैंसर इसी की देन हैं. (फोटो : pixabay.com).
कैंसर का सबसे बड़ा कारण है-पर्यावरण प्रदूषण. दो-तिहाई कैंसर इसी की देन हैं. (फोटो : pixabay.com).

कैंसर एक गैर संक्रामक रोग है यानी कि इसका इन्फेक्शन नहीं फैलता. यह कोई वंशानुगत बीमारी भी नहीं है. फिर भी कभी-कभी कुछ फैमिली में यह रोग एक से अधिक सदस्यों को अपनी चपेट में ले लेता है. कैंसर किसी भी आयु में, किसी भी व्यक्ति को हो सकता है. स्त्री-पुरूष, बच्चे, युवा, वृद्ध सभी इसके शिकार हो सकते हैं.

क्यों होता है कैंसर
कैंसर का सबसे बड़ा कारण है-पर्यावरण प्रदूषण. दो-तिहाई कैंसर इसी की देन हैं. 35 प्रतिशत कैंसर खान-पान व रहन-सहन की आदतों के कारण होता है जैसे-तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, सुपारी, पान-मसाला, शराब आदि का अत्यधिक सेवन. कुछ दवाइयां, हार्मोंस, एक्सरे एवं अल्ट्रा वायलेट किरणें भी कैंसर का कारण बन सकती हैं. यह मानव शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है.

तेजी से फैल रहा है मुंह का कैंसर
वर्तमान में गुटखा या पान मसाला खाने का व्यसन जिस तेजी से बढ़ा है, उसी अनुपात में मुंह के कैंसर के रोगियों में भी वृद्धि हुई है. मुंह के कैंसर के इलाज की अब कई आधुनिक विधियों का आविष्कार हो चुका है. रेडियोथेरेपी द्वारा मुंह के कैंसर का काफी सीमा का उपचार संभव है, लेकिन इन नई विधियों के बाद भी अगर यह बीमारी हो जाए तो आज भी उसका शत-प्रतिश इलाज संभव नहीं है.

इन लोगों में होता है मुंह का कैंसर
सामान्यत: मुंह का कैंसर उन व्यक्तियों में अधिक होता है जो तंबाकू का प्रयोग चूने के साथ करते हैं और बीड़ी, सिगरेट या सिगार पीते हैं. ग्रास नली के कैंसर के रोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. इसका मुख्य कारण भोजन-प्रदूषण है.

माइक्रोटॉक्सिन और नाइट्रोसीमेंस जैसे पदार्थ कैंसर पैदा करने वाले पाए गए हैं. कुछ मेडिकल डिसऑडर्स जैसे टाइलोसिस पामेरिस, पैटर्सनब्राउन, कैलीसिंड्रोम, खाने में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया, ग्रास नली का एक्लेजिया इस कैंसर के दूसरे प्रकार हैं. अन्न नली के कैंसर का उपचार कीमोथेरेपी, बाह्य विकिरण चिकित्सा और अंतः विकिरण चिकित्सा के समन्वित सहयोग से किया जाता है जिसके अच्छे परिणाम सामने आये हैं. फिर भी इसमें 20 से 30 प्रतिश रोगियों में भी पूर्णरूपेण रोगमुक्त होने की संभावनाएं बन पाती हैं.

कैंसर एक गैर संक्रामक रोग है यानी कि इसका इन्फेक्शन नहीं फैलता. यह कोई वंशानुगत बीमारी भी नहीं है.
कैंसर एक गैर संक्रामक रोग है यानी कि इसका इन्फेक्शन नहीं फैलता. यह कोई वंशानुगत बीमारी भी नहीं है.

ब्लड कैंसर भी है खतरनाक
ब्लड कैंसर से हर साल हजारों व्यक्ति मौत के मुंह में जा रहे हैं. ब्लड कैंसर के दो वर्ग हैं. एक वर्ग ‘क्रॉनिक रक्त कैंसर‘ का था दूसरा वर्ग ‘एक्यूट रक्त कैंसर‘ का होता है. कुछ कैंसर ऐसे होते हैं जो सिर्फ महिलाओं को होते हैं. इनमें से एक है स्तन कैंसर. पैंतीस से चौवन वर्ष की आयु की महिलाओं को होने वाला सबसे घाक रोग स्तन कैंसर है.

क्यों होता है ब्रेस्ट कैंसर
साइंटिस्ट कहते हैं कि स्तन कैंसर हार्मोन में परिवर्तन, बी.आर.ए.सी.जीन, वंशानुग प्रभावों, अधिक उम्र में गर्भ धारण, मासिक चक्र की अनियमिता, रजोनिवृत्ति एवं पर्यावरण में विद्यमान कैंसरजन्य पदार्थों के कारण हो सकता है.

वैसे अब तक किए गए रिसर्च के मुताबिक स्तन कैंसर का सबसे प्रमुख कारण महिलाओं द्वारा बच्चों को स्तनपान न कराना माना गया है. ब्रैस्ट कैंसर का प्रारंभिक अवस्था में दवाइयों, इंजेक्शनों आदि की मदद से अथवा कैमोथेरेपी चिकित्सा पद्धति द्वारा इलाज किया जाता है. सर्जरी, रेडिएशन एवं हार्मोन थेरेपी स्तन कैंसर के उपचार की अन्य विधियां हैं.

साइंटिस्ट के मुताबिक कैंसर को कंट्रोल करने में विटामिन ‘ए‘ और ‘बीटा‘ केरोटिन तत्व पूरी तरह से सक्षम हैं. (फोटो : pixabay.com).
साइंटिस्ट के मुताबिक कैंसर को कंट्रोल करने में विटामिन ‘ए‘ और ‘बीटा‘ केरोटिन तत्व पूरी तरह से सक्षम हैं. (फोटो : pixabay.com).

एक नहीं कई कारण हैं कैंसर के
कैंसर के अनेक प्रकारों के अनुसार उसके कारण भी बहुआयामी हैं, लेकिन कई शोधों से यह तथ्य निर्विवाद रूप से सत्य है कि उसकी रोकथाम में शरीर की आंरिक क्षमता की भूमिका बड़ी महत्त्वपूर्ण हो सकती है. कैंसर जैसे रोग के हो जाने के बाद उपचार भले ही कठिन है लेकिन थोड़ी वैज्ञानिक जीवन शैली और थोड़े संतुलित आहार के सहारे काफी सीमा तक अपने आप को कैंसर से सुरक्षित रखा जा सकता है. समुचित खान-पान कैंसर से लड़ने का प्रमुख हथियार बन सकता है.

क्या कहते हैं साइंटिस्ट
साइंटिस्ट के मुताबिक कैंसर को कंट्रोल करने में विटामिन ‘ए‘ और ‘बीटा‘ केरोटिन तत्व पूरी तरह से सक्षम हैं. ये प्राकृतिक रूप से साग-सब्जियों में पाए जाते हैं. ये मैथी, पालक, गोभी, आलूबुखारे एवं गाजर आदि में उपलब्ध होते हैं. जिन देशों-प्रदेशों के लोग भोजन में हरी साग-सब्जी एवं ताजी फलों का सेवन करते हैं, वहां के लोग रोगी बहुत कम पाए जाते हैं. विटामिन ‘सी‘ से युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करके भी कैंसरों से बचा जा सकता है.

लाइफ स्टाइल से बचा जाता है कैंसर से
सीधी-सरल नैचरल लाइफ स्टाइल अपनाकर एवं साग-सब्जी, ताजे फलों के नियमित सेवन से कैंसर जैसी घातक बीमारी से दूर रहा जा सकता है. इसके लिए लोगों में जागरूकता पैदा करके कैंसर के भयावह शिकंजे से मुक्त रहने का सामूहिक प्रयास किया जाना चाहिए. ‘सादा जीवन, सादा भोजन‘का सूत्र ही मानव जाति को इस भयावह बीमारी से बचा सकता है.

(नोट : यह लेख आपकी जागरूकतासतर्कता और समझ बढ़ाने के लिए साझा किया गया है. यदि किसी ला ईलाज बीमारी के पेशेंट हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें.)

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उमेश कुमार साहू

लेखक और पत्रकार

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